उज्जैन / कान्ह का जितना पानी साफ हो रहा है उसे फिर गंदे पानी में मिलाकर उज्जैन की तरफ छाेड़ रहे

इंदाैर के ट्रीटमेंट प्लांट पू्र्ण क्षमता से नहीं चलाए जा रहे हैं, इसलिए मैली हो रही शिप्रा नदी


उज्जैन  . शिप्रा नदी का पानी काला व प्रदूषित हाेने के पीछे नगर निगम इंदाैर के अफसराें की लापरवाही सामने अाई है। ये जिम्मेदार अफसर ट्रीटमेंट प्लांट का पूर्ण क्षमता से उपयाेग नहीं करवा पा रहे हैं नतीजा बगैर ट्रीट हुअा कान्ह का पानी शिप्रा में मिलने से वह पूरी तरह से काली हाे गई। बड़ी लापरवाही ये है कि जितना पानी ट्रीट किया जा रहा है, उसे पुन: कान्ह के रास्ते गंदे पानी में मिलाकर उज्जैन की तरफ छाेड़ा रहा है।
इंदाैर में राेजाना करीब 300 एमएलडी गंदा व सीवर का पानी निकलता है।


कान्ह नदी के रास्ते ये पानी उज्जैन पहुंचता रहा है। ये गंदा पानी ट्रीट हाेकर उज्जैन अाए इसके लिए सिंहस्थ में इंदाैर में कबीट खेड़ी में 335 एमएलडी क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया था। इंदाैर निगम ने संचालन के लिए ये प्लांट निर्माण करने वाली सूरत की इंवायराे कंट्राेल कंपनी काे ही तीन साल के लिए ठेके पर दे रखा है। पंद्रह दिन पहले कान्ह के गंदे पानी से शिप्रा मैली हाे गई ताे सवाल खड़े हुए कि इंदाैर में ट्रीटमेंट प्लांट हाेने के बावजूद एेसा कैसे हुअा? इधर भास्कर ने जब कबीट खेड़ी के प्लांट पर जाकर पड़ताल की ताे इंदाैर निगम के अफसराें की बड़ी लापरवाही सामने अाई।


पंप बंद, 335 एमएलडी क्षमता अाैर पानी ट्रीट किया 200 एमएलडी
एमअार 10 के अागे चंद्रगुप्त चाैराहे के समीप कबीट खेड़ी में 245,78 अाैर 12 सहित कुल 335 एमएलडी का ट्रीटमेंट प्लांट है। ये 21 एकड़ में फैला है। तीन इकाई में बंटे इस प्लांट के दाेपहर में कुछ पंप बंद थे अाैर प्रक्रिया रुकी हुई थी। कारण पूछने पर यहां माैजूद निगम के सहायक यंत्री अारएस देवड़ा ने तर्क दिया कि नई व्यवस्था कर रहे हैं। ट्रायल करने के लिए ये पंप कुछ देर के लिए बंद किए हैं। उन्हाेंने दावा किया कि पिछले 24 घंटे में करीब 200 एमएलडी पानी ट्रीट किया है।


यानी ये राेजाना निकल रहे गंदे पानी से 100 एमएलडी तक कम था। इससे स्पष्ट हुअा कि न ताे प्लांट का पूरी क्षमता से उपयाेग हाे रहा है न ही कान्ह का पूरा पानी यहां ट्रीट किया जा रहा है। दूसरी बड़ी लापरवाही प्लांट में ये भी देखने काे मिली कि कान्ह का जितना पानी यहां ट्रीट किया जा रहा था उसे पुन: समीप से ही गुजर रही कान्ह नदी के बहते गंदे पानी में ही मिलाते हुए उज्जैन की तरफ छाेड़ा जा रहा था। वजह पूछने पर देवड़ा ने कहा कि ये हमारी मजबूरी है।


शिप्रा काे गंदा होने से बचाने के लिए यह स्थाई समाधान
{ इंदाैर से कान्ह के पूरे पानी काे ट्रीट करके ही उज्जैन की तरफ छाेड़ा जाए। साथ में जरूरी ये भी कि वहां से उज्जैन तक बीच में जहां-जहां से छाेटे-माेटे नाले-नालियाें से कान्ह में गंदा पानी मिलता है उसे भी ट्रीट करने व राेकथाम की स्थाई व्यवस्था हाे। { पिपलियाराघाै से नदीनुमा खुला नाला शिप्रा के सभी घाटाे काे बायपास करते हुए कालियादेह महल तक बनाया जाए।


प्लांट पर केमिकल नहीं मिला रहे, इसलिए पानी साफ नहीं हो रहा
^नगर निगम इंदाैर ने ट्रीटमेंट प्लांट काे ठेके पर दे रखा है लेकिन ठेकेदार चाेरी कर रहा है। वाे उसमें केमिकल मिला नहीं रहा है, इसलिए पानी साफ हाेकर नहीं अा रहा है। इस संबंध में मैंने नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्द्धन सिंह से अनुराेध किया है। उन्हाेंने कहा है कि वे निगमायुक्त काे कहेंगे कि पानी ट्रीट करके ही छुड़वाएं। - हुकुम सिंह कराड़ा, मंत्री जल संसाधन।



दो बार पत्र लिख चुका हूं
 जाे भी लापरवाही सामने अा रही है, इस संबंध में मंैने इंदाैर कलेक्टर से दाे बार चर्चा की है। दाे बार उन्हें पत्र भी लिख चुका हूं। उम्मीद है स्थिति में सुधार हाेगा।  - शशांक मिश्र, कलेक्टर उज्जैन। 



हम गंदे पानी को ट्रीट करके ही छोड़ रहे हैं
 जितना हाे पा रहा है, हम कान्ह के गंदे पानी काे ट्रीट करके ही छाेड़ रहे हैं। कुछ कारणाें से गंदा पानी भी चला जाता हैं ताे इतना प्रभावी नहीं रहता है। इंदाैर से उज्जैन के बीच में भी बहुत शहर व गांव हैं उनका भी गंदा पानी मिलता है। - सुनील गुप्ता, कार्यपालन यंत्री व प्रभारी ट्रीटमेंट प्लांट, नगर निगम इंदाैर